Saturday, October 31, 2009

"तरुण......."

प्यारे दोस्तों,


आज मैं आपके सामने तरुण को लेकर आया हूँ। तरुण भैय्या आपका स्वागत है ...मेरे ब्लॉग पर.......
मेरे लिए क्या लाये हो भाई ......?और जल्दी से हमें बताओ!


"चंदा मामा जल्दी आओ ....
वरना हम आते हैं ,
दूरी का अब प्रश्न नहीं है...
रोकेट हमीं बनाते हैं।"

"बूँद - बूँद के संग्रह से....
सागर भी भर जाए,
तिनका- तिनका जोड़कर......
चिड़िया महल बनाये।"
बहुत अच्छे तरुण भैय्या, आपने बहुत ही प्यारी कविता लाई है ....
आपका बहुत -बहुत शुक्रिया .....
कृपया आप अपने बारे में भी बताइये।
......मैं तरुण चंद्राकर , कक्षा चौथी का छात्र हूँ .......मैं एक बहुत ही प्यारा लड़का हूँ ,...मेरी एक छोटी बहन भी है.
मेरे मम्मी -पापा दोनों मेहनत कर कमाते हैं और हमें पढ़ाते हैं.....
मम्मी - पापा दोनों खाना बनाने का काम करते हैं।
.....दोस्त तुमको पता है .....
एक बार जब मुझे किसी काम से बाज़ार भेजा गया था ....
तो न जब मैं लौट रहा था तो रास्ते में एक पुलिस की गाड़ी ने मुझे रोक लिया और पुलिस स्टेशन ले गयी .....
मेरे साथ और भी बच्चे थे .....
मैं सबसे छोटा था .....
वहां मेरे हाथ में खूब डंडे मारे गए ........
और पूछा "कहाँ रखा है सामान? चल तेरे घर में दिखा क्या-क्या सामान है? ........"
मेरा हाथ सूज गया था ......मैं बहुत रोया ....
मेरी मम्मी बहुत परेशान हो गई , जब मुझे पुलिस जेल ले गई थी .......
दो दिन मुझे पुलिस स्टेशन में रखा गया ....
जब मेरी मम्मी उन पर गुस्सा हुई और कहा -
"देखो इन छोटे बच्चों को क्या लगता है ? ये सिलेंडर उठा कर ले जा सकते हैं ?...और क्या ये सोना चोरी कर सकते हैं? लॉकर तोड़कर, जिसने यह किया है पकड़ में नहीं आया तो .....बच्चों को पकड़ लिया .....
ये भी न सोचा कि इन पर क्या असर होगा ?"
तब उन्होंने हमें छोड़ा।
दरअसल हमारे मोहल्ले में एक चोरी हुई थी ना ...बड़ी चोरी हुई थी ।
कुछ लोगों ने शायद मेरा भी नाम लिया था , ..क्यों?
....एक बार मेरे पिताजी का किसी के साथ कुछ झगड़ा हुआ था ना तो उनको २ - ३ महीने की जेल हो गई थी .....और ना जब चाहे पुलिस उनको ले जाती है ......
और क्या बताऊँ दोस्त ...तब से लोग हमें शक की नज़र से देखते हैं ....
मैं अभी कितना छोटा हूँ....
किंतु जब पुलिस मुझे पकड़ कर ले गई मोहल्ले वालों के सामने .....
तब से ये बोलतें है मुझे ...
"ये लड़का तो ऐसा ही है ..."
मेरे बालमन पर बहुत ही बुरा असर पड़ा है दोस्त.....
लेकिन अब तुम मिल गए हो ना मेरे प्यारे दोस्त तो मुझे अब बहुत ही अच्छा लग रहा है .....
दोस्त ये मेरी छोटी बहन हिमांशी है यह भी कुछ कविता लाई है .....
सुनाओ हिमांशी .....

"मोटू ने खाया ....
पापा ने पकड़ा ,
मम्मी ने बनाया ...
बड़ा मज़ा आया। "
और
"चंद्रलोक की चीजें लेंगें,
दूध बताशे भाते हैं .....
चमक - चाँदनी में खेलेंगे ,
बड़ी सुहानी रातें हैं।"

बहुत खूब हिमांशी ....
तरुण भैय्या और हिमांशी दीदी आप दोनों को मेरी ओर से बहुत-बहुत प्यार.....
आप दोनों अपने जीवन में खूब तरक्की करें .....
कामयाब बनें .......
ईश्वर से दुआ है हमारी ...

Wednesday, October 28, 2009

"अनन्या दीदी"

अनन्या दीदी आपका "बच्चों की दुनिया" में स्वागत है।

अनन्या दीदी ३ साल की हैं और इन्हें पूजा - पाठ करने में बेहद आनंद आता है। जब दीदी अपनी नानी के साथ पूजा करती है ना ! तो अगर नानी के सिर से जरा सा भी आँचल ढल जाता तो दीदी नानी पर नाराज होकर कहती " नानी cap"
तो नानी हँसते हुए सिर ढँक लेती हैं।
एक बात और बताऊँ दीदी जब भी किसी के घर जाती है तो उसे पूजा घर में बड़ा मजा आता है बस लग जाती है पूजा करने में।
अनन्या दीदी गाजियाबाद में रहती हैं और रोज शाम को पास के पार्क में खेलने जाती है वहां उनके दोस्त सारे बुजुर्ग होते हैं। पार्क जाते वक्त एक मन्दिर पड़ता है वहां वह जरूर जाती है और पुजारी से टिका और प्रसाद लेती है।

अनन्या दीदी की एक खास बात और ...
दीदी भरतनाट्यम के अंतर्गत "शिव स्तुति, भूमि प्रणाम और नाट्य Adavu" भी करती हैं।
आपको यकीं नहीं आता ना तो इस विडियो क्लिप को देखिये।

शिव स्तुति-"आङ्गिकं भुवनं यस्य वाचिकं सर्वाङ्गमयं।
आहार्य चन्द्र तारादी त्वं नम: सात्विकं शिवम्



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"Natya Adavu"

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Tuesday, October 27, 2009

"आदित्य"




सभी बड़ों की ब्लॉग है तो हम बच्चे क्या करें ? तो हमारी बड़ी मम्मी ने भी हमारे लिए एक ब्लॉग बना दिया और कहा कि अपने दोस्तों को भी बुला लो और और उनको भी अपने दोस्तों से मिलवाओ। आप सभी मुझसे पहले ही मिल चुके हैं और क्या बताऊँ दोस्तों .....
मेरी माँ दिन रात सेवा करती रहती है ताकि मैं जल्दी से अच्छा हो जाऊँ........
सबकी माँ अपने बच्चों के लिए करती है , कभी भी अपनी माँ का दिल मत दुखाना दोस्तों ....
मैं दुनिया कि सभी माताओं को प्रणाम करता हूँ और उनसे उनके बच्चों की ओर से पूछना चाहता हूँ...
कौन सा दर्द बड़ा है तुम्हारा माँ ?
जब तुमने रखा मुझे नौ महीने कोक में,
जब तुमने जन्म मुझे दिया ,प्रसव कि पीड़ा सहकर,
या अब
जब तुमने मेरे बर्ताव के डंक सहे?
कौन सा दर्द बड़ा तुम्हारा माँ ?
जवाब दो माँ
सहती क्यों हो इन पीड़ाओं को.....
देखो अपनी माँ की आंखों में जवाब मिल जाएगा.............