Saturday, March 6, 2010

sachin's poem- Examination & एक माँ की बेबसी

EXAMINATION
Oh, Its examination!
Must study with concentration,
Maths with its calculation,
English with its pronunciation,
Chemistry with its equation,
Physics with its variation,
History with its variation,
Civics with its constitution,
All the syllabus give us Tension,
But after the examination,
Its time for celebration,
.
.
.
"एक माँ की बेबसी "
न जाने किस अदृश्य पड़ोस से
निकल के आता था वह
खेलने हमारे साथ
रतन, जी बोल नहीं सकता था
खेलता था हमारे साथ
एक टूटे खिलौने की तरह
था वह भी एक बच्चा।
लेकिन हम बच्चों के लिए अजूबा था
क्योंकि हमसे भिन्न था।
थोडा घबराते भी थे हम उससे
क्योंकि समझ नहीं पाते थे।
.
.
सचिन भैया, कक्षा पांचवी के छात्र हैं ........
सचिन भैया हमें आपकी दोनों कविताएं बहुत पसंद आई....
आपका बहुत आभार इस सुन्दर सी कविता के लिए।

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